महादलित महिला के साथ रेप और बेटे की हत्या कर नहर में फेंक दिया था, भाई बोला वह अस्पताल में है, वहां 3 घंटे ढूंढा तो नहीं मिली
बक्सर जिले के मुरार थाना क्षेत्र का एक गांव ओझाबरांव इन दिनों चर्चा में है। वजह है एक महादलित महिला के साथ गैंगरेप और उसके पांच साल के बेटे की हत्या। पांच दिन पहले दोनों को बांधकर गांव की ही एक नहर में फेंक दिया गया था। बच्चे की मौत हो चुकी है, लेकिन पीड़ित कहां है इसको लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है!
मंगलवार को जानकारी मिली थी कि वह बक्सर सदर अस्पताल में भर्ती है। बुधवार को जब हम अस्पताल पहुंचे तो पीड़ित या उसका कोई भी परिजन नहीं दिखा। इसको लेकर अस्पताल के कर्मचारियों से सवाल किया तो ज्यादातर लोगों ने कहा कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि वह यहां से चली गई है। जब हमने पूछताछ केंद्र से जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा कि फर्स्ट फ्लोर पर चले जाइए, वहां गए तो बताया गया कि सेकंड फ्लोर पर जाइए। वहां से फिर ग्राउंड फ्लोर पर जाने को कहा गया।
इसके बाद जब हम अस्पताल प्रबंधन विभाग में गए तो वहां अधिकारी नदारद थे। करीब तीन घंटे हम अस्पताल में रहे। हमें ऊपर- नीचे, दाएं- बाएं जहां बोला गया, हर एक वार्ड में गए, लेकिन कहीं भी पीड़ित या उसके परिजन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
इस पूरे मामले को लेकर जब बक्सर के एसपी नीरज कुमार सिंह को फोन किया तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे फोन पर कोई जानकारी नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि आप ऑफिस आ जाइए। फिर वहां से हम उनके ऑफिस के लिए निकल गए। जब ऑफिस पहुंचे तो वे कहीं और निकल चुके थे। करीब दो घंटे इंतजार के बाद उनसे मुलाकात हुई। जब सवाल किया कि पीड़ित कहां है, तो उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में कोई भी जानकारी नहीं देंगे। बार-बार वही सवाल दोहराया तो उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में आ जाइएगा।
वहां से हम पीड़ित के गांव के लिए निकल गए। शाम छह बजे के करीब पीड़ित के गांव पहुंचे। घर के बाहर ही उसके भाई से मुलाकात हो गई। जब उनसे सवाल किया कि बहन कहां है तो उन्होंने कहा कि वह अस्पताल में है। आज पिता जी घर पर खिचड़ी लेने आए थे। उनको पुलिस अपने साथ लाई थी और साथ ही लेकर गई। एक मिनट भी उन्हें अकेले नहीं होने दिया।
जब हमने पूछा कि क्या उनकी बहन से बात हुई? इस सवाल के जवाब में पीड़ित के भाई ने कहा कि पहले दिन ही अपनी बहन को देखा था तब से कोई बात नहीं हुई है। वहां रहने पर पिता से भी बात नहीं होती है। कहा जा रहा है कि फोन चार्ज नहीं है, इसलिए बात नहीं हो पा रही है।
मंगलवार को भी हम पीड़ित के घर गए थे। वहां देखा कि बाहर मीडिया और स्थानीय नेताओं का जमावड़ा लगा है। अंदर उसकी मां का रो रोकर गला रुंध गया है, चार-पांच महिलाएं उन्हें समझाने की कोशिश कर रही हैं। वह कभी जोर-जोर से दहाड़ मारकर रोने लगती है तो कभी थोड़े समय के लिए खामोश हो जाती है।
पीड़ित की मां कहती हैं, 'एके त लाइकवे रहला, हतिये चुकी पे से पलले रहनिया। हमरे संगे रहते रहला। उ का बिगड़ले रहला कि ओकरा के मार देलेहासन। (एक ही तो लड़का था, इतना छोटा था तब से ही मेरे साथ रहता था। वह किसी का क्या बिगाड़ा था जो उसको मार दिया।)
वे कहती हैं, ' हमें कोई धन दौलत नहीं चाहिए, जिसने मेरी बेटी साथ दरिंदगी की है और उसके बच्चे को मारा है, उसी तरह उसको भी सजा मिलनी चाहिए। हमारी एक ही मांग है कि उन दरिंदों फांसी दी जानी चाहिए। तब उन्होंने पुलिस पर भी सवाल उठाए थे। पीड़ित की मां ने कहा था कि जब उसकी बेटी स्वस्थ है, उसे कोई दिक्कत नहीं है तो इतने दिनों से अस्पताल में क्यों रखा है...?
उन्होंने कहा था, 'हमरा त लागत कि कौनो दबाव बा। उ चाहता लोग कि लइकी कुछु गलत शब्द बोलो और उल्टा ओकरा पर केस हो जाए। त पूरा परिवार पर केस कर दलो अउरी ले चललो जेल में। (हमें लगता है कि उस पर दबाव है। ये लोग चाहते हैं कि वह कुछ गलत बोले और उसके ऊपर उल्टा केस दर्ज हो जाए। जब यही करना है तो ले चलिए हम सब को जेल में बंद कर दीजिए।)
अब बड़ा सवाल यही है कि अगर पीड़ित अस्पताल में है तो उसे नजरबंद क्यों रखा गया है। उसके पिता पुलिस की कस्टडी में क्यों है। इस मामले को लेकर कोई भी अधिकारी बयान क्यों नहीं दे रहे हैं? पीड़ित के लिए अस्पताल में खाने की व्यवस्था क्यों नहीं है, क्या मजबूरी है कि 35 किमी दूर से उसके लिए खिचड़ी लाई जा रही है?
घटना के बारे में पीड़ित के भाई ने बताया कि शनिवार को उसकी बहन अपने पांच साल के बेटे के साथ बैंक गई थी। दिन के करीब 10 बजे वह घर से निकली थी। जब 3-4 बजे शाम तक नहीं लौटी तो हमने इधर-उधर ढूंढना शुरू किया। पूरा गांव घूम लिया, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। बैंक जाकर भी देखा तो वहां ताला लगा हुआ था। उसे ढूंढते-ढूंढते रात हो गई, लेकिन वह नहीं मिली। हम पूरी रात जागते रहे, रिश्तेदारों को फोन भी किया, कहीं से कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन तीन बजे तड़के वह नहर में बेहोश मिली। बच्चे की मौत हो चुकी थी।
जिस बुजुर्ग ने महिला को सबसे पहले देखा था उनका नाम सुधर राम है। वे बताते हैं, 'मैं करीब तीन बजे शौच के लिए घर से निकला तो सामने की नहर से बचाओ-बचाओ चिल्लाने की आवाज आ रही थी। छप-छप पानी में कोई कर रहा था। इसके बाद मैंने गांव वालों को आवाज लगाई। लोग इकट्ठा हुए, जब नहर के पास हम गए तो देखा कि महिला बेहोश पड़ी है, उसकी साड़ी से बांधा हुआ बच्चा मर चुका है।
अभी गांव में माहौल शांत है, कहीं भी मुझे पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखी। घटना को लेकर कम ही लोग बात करना चाहते हैं। ज्यादातर लोग हमारा कुछु मालूम नईखे (हमें जानकारी नहीं है) कहकर निकल लेते हैं। इसके पीछे बड़ी वजह है कि पीड़ित और आरोपी दोनों एक ही गांव के हैं। इसमें से एक आरोपी जो गिरफ्तार किया जा चुका है वह पीड़ित की जाति का ही है, इसलिए भी लोग कुछ बोलने से बच रहे हैं।
बिहार में चुनाव है। यहां पहले ही चरण में वोटिंग होनी है। चूंकि पीड़ित और आरोपी दोनों महादलित और पिछड़ा वर्ग से हैं, इसलिए राजनीतिक पार्टियां फूंक-फूंककर कदम रख रही हैं। घटना के पांच दिन बाद भी सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य को छोड़ दें तो किसी भी दल का कोई बड़ा नेता यहां नहीं आया है। एक दो स्थानीय नेता ही अभी तक यहां पहुंचे हैं। उधर सरकार की कोशिश है कि किसी भी तरह से इस मामले को हाईलाइट नहीं होने दिया जाए।
इस बीच बुधवार रात को बक्सर एसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नया खुलासा किया। उन्होंने कहा कि महिला की कॉल डिटेल्स से पता चला है कि मामला प्रेम प्रसंग और अवैध संबंध का है। उन्होंने बताया कि महिला का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि महिला अपने आशिक के साथ गई थी। इस संबंध में दो लोगों की गिरफ्तारी की भी जानकारी उन्होंने दी।
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