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जब उद्देश्य को लेकर स्पष्ट होंगे, आप राम जैसे हैं और जब भ्रम में होंगे तो समझो भीतर रावण जाग चुका है

मनुष्य का सबसे बड़ा सहज ज्ञान क्या होता है? जवाब मिलेगा आत्मरक्षा। अब सबसे बड़ा अज्ञान क्या होता है? तो उत्तर होगा भ्रांति। इसको मुगालता भी कहते हैं और शास्त्रों में इसी को मतिभ्रम भी कहा गया है। रणभूमि में श्रीराम आत्मरक्षा के लिए खड़े थे। युद्ध के पीछे का उनका उद्देश्य यही था। रावण पूरी तरह से ग़लतफहमी में था। इतना बड़ा भ्रम था उसको कि ‘राम बचन सुनि बिहंसा मोहि सिखावत ग्यान। बयरू करत नहिं तब डरे अब लागे प्रिय प्रान।’ श्रीराम की बात सुन पहले तो वह खूब हंसा फिर कहता है मुझे ज्ञान सिखाते हो? उस समय बैर करते तो डरे नहीं, अब प्राण प्यारे लग रहे हैं?

यहां रावण को पूरी तरह से भ्रांति थी। राम न पहले डरे थे, न अब डर रहे थे। रावण को कभी कोई ज्ञान भी उन्होंने नहीं बांटा। लेकिन, जब किसी को यथार्थ बताओ, आईना दिखाओ और सामने वाला समझे कि मुझे ज्ञान दिया जा रहा है, तो यह उसकी ग़लतफहमी है। रावण जैसे लोग जब अहंकार में डूबते हैं तो पढ़े-लिखे होने के बाद भी भ्रमित हो जाते हैं। हमारे ही भीतर रावण भी है और राम भी। जब उद्देश्य को लेकर स्पष्ट होंगे, आप राम जैसे हैं और जब भ्रम में होंगे तो समझो भीतर रावण जाग चुका है।



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पं. विजयशंकर मेहता


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जब उद्देश्य को लेकर स्पष्ट होंगे, आप राम जैसे हैं और जब भ्रम में होंगे तो समझो भीतर रावण जाग चुका है जब उद्देश्य को लेकर स्पष्ट होंगे, आप राम जैसे हैं और जब भ्रम में होंगे तो समझो भीतर रावण जाग चुका है Reviewed by Unknown on October 12, 2020 Rating: 5

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