अगर हम इस सजगता के साथ जिएं कि ईश्वर सिर्फ मूर्तियों में नहीं है, बल्कि हर पल हमारे साथ है, तो हम आस-पास एक शानदार दुनिया बना सकते हैं
क ल्पना कीजिए कि आप यह लेख पढ़ रहे हैं और आपके दरवाजे पर कोई दस्तक दे रहा है। आप दरवाजा खोलते हैं और व्यक्ति कहता है, ‘मैं कृष्ण हूं।’ आप आधुनिक कपड़े पहले व्यक्ति की ओर देखकर पूछते हैं, ‘कौन कृष्ण?’ वह कहता है, ‘वही कृष्ण जिसकी तुम पूजा करते हो। मैंने सोचा कि मैं एक हफ्ते के लिए चौबीसों घंटे तुम्हारे साथ रहूं।
चिंता मत करो, मुझे तुम्हारे सिवा और कोई देख या सुन नहीं पाएगा। मैं बस देखना चाहता हूं कि तुम जिंदगी कैसे जीते हो। लेकिन याद रखना, मैं तुम्हें हमेशा दिखता रहूंगा, पर तुम कभी मेरा परिचय किसी से नहीं करा सकते।’ आप उस व्यक्ति को अंदर ले आते हैं लेकिन आपकी पत्नी उसे नहीं देख पातीं। वे ऐसे व्यवहार करती हैं जैसे आस-पास कोई न हो।
अब आप तैयार होकर काम पर जा रहे हैं। आप कार में बैठते हैं और देखते हैं कि दूसरी सीट पर पहले से ही कोई है। रास्ते में एक क्लाइंट का फोन आता है। चर्चा में आप उसे बताना चाहते हैं, ‘यह कीमत सिर्फ आपके लिए है और मैं इतने कम में किसी को नहीं देता।’ लेकिन आप ऐसा नहीं कह पाते क्योंकि जानते हैं कि यह झूठ है, जो आप रोज सभी से कहते हैं। आप कृष्ण की ओर देखते हैं और भगवान आंखों-आंखों में ही कहते हैं, ‘तुम जारी रखो।’ और अचानक आप कीमत में कुछ सौ रुपए कम कर देते हैं और ऊपर कही गई बात दोहराते हैं।
आप जानते हैं कि अब आप सच बोल रहे हैं। फिर उस पूरे दिन में आप वही करते हैं जो एक अच्छे इंसान को करना चाहिए क्योंकि आप पर लगातार कृष्ण की नजर है। आप पत्नी का फोन उठाते हैं और उनसे एक बार भी नहीं कहते कि ‘मीटिंग में हूं’, क्योंकि आप नहीं थे। आपकी पत्नी पूछती हैं, ‘आज अचानक कोई मीटिंग क्यों नहीं है?’ पूरे दिन ऑफिस के बाकी लोगों को भी ऐसा ही लगता है। रात में सोते समय आपको एक अलग अहसास होता है, जिसे आप समझा नहीं सकते हैं।
आप खुद को समझाते हैं, ‘मैं बुरा आदमी नहीं हूं, लेकिन मैं अक्सर अपना हित पहले रखता हूं, जैसा इस व्यावसायिक दुनिया में सभी करते हैं।’ लेकिन आज कुछ अलग लगा। आपने वैसा ही व्यवहार किया जैसा आपको बनाने वाले ने पृथ्वी पर भेजकर आपसे चाहा था।
मुझे यह वॉट्सएप स्टोरी तब याद आई जब मेरी पत्नी ने बालाजी की मूर्ति मेरी कार में रखी क्योंकि मैं काम के लिए लंबी ट्रिप पर जा रहा था। वे बोलीं, ‘सावधानी बरतिएगा और ये आपकी रक्षा करेंगे और नजर रखेंगे।’ यह मार्च के लॉकडाउन के बाद मेरी पहली ट्रिप थी। ‘नजर रखेंगे’ शब्द मेरे मन में गूंजते रहे और मैं ट्रिप में हर कदम पर सावधान रहा। बार-बार हाथ धोने से लेकर बाकी साफ-सफाई वाले व्यवहार, जैसे मास्क पहनने तक का ध्यान रखा, जिनका हम घर पर बुजुर्गों के होने पर ‘सख्ती’ से पालन करते हैं, लेकिन आमतौर पर ऐसी चीजें भूल जाते हैं, इसलिए नहीं कि हम लापरवाह हैं, बल्कि ध्यान न देने के कारण।
‘कॉन्शियस लिविंग’ (सजग जीवन) का क्या अर्थ है? इसका मतलब है अपने जीवन को नियंत्रित करना, सोच-समझकर फैसले लेना और जो जीवन हमारे साथ घटित हो रहा है, उससे समझौता करने की बजाय वह जीवन जीना, जो हम चाहते हैं।
फंडा यह है कि अगर हम इस सजगता के साथ जिएं कि ईश्वर सिर्फ मूर्तियों में नहीं है, बल्कि हर पल हमारे साथ है, तो हम आस-पास एक शानदार दुनिया बना सकते हैं।
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