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जीवन में जब एक ऊब पैदा होती है तब हम कुछ सनसनीखेज खोजते हैं

मुंबई पुलिस ने कुछ खबर देने वाली टेलीविजन कंपनियों पर आरोप लगाया है कि अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए वे रिश्वत देती हैं। कुछ घरों के टेलीविजन सेट में लोकप्रियता मापक यंत्र लगाए जाते हैं। परिवारों से कहा जाता है कि अमुक चैनल अधिक समय तक देखें और ना भी देखना हो तो वह चैनल चालू रखें ताकि नकली आंकड़े रचे जा सकें। इन्हेंं देखने और नहीं देखने के लिए परिवारों को धन भी दिया जाता है। अरसे पहले ‘8 A.m WAR’ नामक फिल्म बनी थी।

चैनल मालिक दो गरीब दोस्त दुश्मन देशों को ठीक 8 बजे युद्ध छेड़ने का आदेश देते हैं और उसी समय चैनल पर युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाया जाता है। इस खेल में सबसे पहले खबर देने की प्रतिस्पर्धा चलती है। अजीज मिर्जा की फिल्म ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ में नायक शाहरुख खान एक चैनल का स्टार रिपोर्टर है। जूही चावला एक अन्य चैनल की रिपोर्टर है। दोनों के बीच पहले खबर देने की प्रतियोगिता चलती है। एक-दूसरे से लड़ते-झगड़ते हुए ये लोग एक दूसरे से प्रेम करने लगते हैं। कुंदन शाह और अजीज मिर्जा ने ‘नुक्कड़’ नामक सीरियल रचा। इसकी सफलता पर राज कपूर ने ‘नुक्कड़’ की टीम को एक दावत दी थी टीम ने बताया कि उन्हें फिल्म ‘श्री 420’ के फुटपाथ दृश्यों से ‘नुक्कड़’ बनाने की प्रेरणा मिली।

तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा। बहरहाल समाचार प्रसारण चैनल में घोटाला उजागर हुआ है। घोटालों पर किसी एक राजनीतिक दल का एकाधिकार नहीं है। सभी खेल में शामिल हैं। मुंबई पुलिस का कहना है कि टीआरपी घोटाले में करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है। पुरानी कथा है कि दुष्यंत ने शकुंतला को अंगूठी दी। नदी में स्नान करते समय अंगूठी फिसली और एक मछली ने उसे निगल लिया। कुछ समय बाद महल में मछलियां बेचने वाला आया। कुछ कमीशन देने पर ही वह मछली बेच पाया। राजमहल के रसोई घर में मछली काटी तो अंगूठी दुष्यंत तक पहुंची और उन्हें शकुंतला की याद आई। दुष्यंत शकुंतला के पुत्र का नाम ‘भरत’ रखा गया और हमारे देश का नाम भारत हुआ। क्या हमारे डीएनए में ही भ्रष्टाचार शामिल है?

सत्य के 2 पैर होते हैं। वर्तमान में एक पैर पर चोट पहुंचा कर उसे लंगड़ा बना दिया गया है। झूठ के हजार पैर होते हैं और वह पैरो को पंख बनाकर उड़ता भी है। एक बार दिल्ली में तत्कालीन राष्ट्रपति के मरने की एक अफवाह फैली। दुकानें बंद हो गईं लोग शोक में डूब गए। बाद में पता चला कि राष्ट्रपति स्वस्थ हैं। ताबड़तोड़ दुकानें खोली गईं और बाजार फिर जगमगाए।

ग़ौरतलब यह है कि आम आदमी अफवाह पर जल्दी यकीन करता है। जीवन में जब एक ऊब पैदा होती है तब हम कुछ सनसनीखेज खोजते हैं। यह जीवन के ढर्रे में परिवर्तन का प्रयास होता है। खबर-संसार में कहते हैं कि ‘कुत्ता मनुष्य को काटे यह कोई खबर नहीं है, परंतु मनुष्य कुत्ते को काटे तो सनसनीखेज खबर बनती है’।

अफवाह के प्रभाव शेयर बाजार पर भी पड़ते हैं। राजनीति के क्षेत्र में अफवाह को हथियार बनाया जाता है। तमाम सरकारी इमारतों में ‘सत्यमेव जयते’ अंकित है। यथार्थ जीवन में झूठ और अफवाह की हवाएं चलती हैं। नया तथ्य सामने आया है कि कोविड, झूठ से भी अधिक गति से फैल रहा है। संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। महामारी के दौर में मानवीय करुणा बनी हुई है। समय ताम्रकर के महामारी विषयक उपन्यास में विस्थापित लोग एक मकान में आश्रय लेते हैं।

मकान मालिक और उसके पुत्र में वैचारिक मतभेद हैं, परंतु दोनों एकमत हैं कि आश्रय दिया जाए। पिता-पुत्र का रिश्ता सुलझ जाता है। कस्बे वाले कहते हैं कि मेहमानों को निकालो, संभवत: वे संक्रमित हैं। वे मकान जलाने की धमकी देते हैं। अच्छा व्यक्ति भीड़ का हिस्सा बनकर हिंसक हो जाता है। व्यवस्था ने भीड़ रची है। व्यक्तिगत विचार और तर्क की तिलांजलि दी जा रही है।



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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक


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जीवन में जब एक ऊब पैदा होती है तब हम कुछ सनसनीखेज खोजते हैं जीवन में जब एक ऊब पैदा होती है तब हम कुछ सनसनीखेज खोजते हैं Reviewed by Unknown on October 09, 2020 Rating: 5

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