आजकल भले और भोले लोग कोरोना की वैक्सीन की तरह हो गए हैं। ढूंढे नहीं मिलते। भोलापन मूर्खता की निशानी मान लिया गया है। लेकिन, फिक्र मत करिए। आपके भीतर जो एक भोला इंसान है, उसे रोज थोड़ा बचाइए और थोड़ा बांटिए। वरना वह आप ही के भीतर कहीं ऐसा खो जाएगा, खत्म हो जाएगा कि जिंदगी के एक मोड़ पर जब अपने ही भीतर के उस भोले इंसान की जरूरत पड़ेगी तो वह नजर नहीं आएगा। फिर उस दिन आप बहुत अशांत और बेचैन हो जाएंगे।
भोलेपन की एक खूबी है कि वह जिसमें होता है, उसको बहुत जल्दी शांत कर देता है। शास्त्रों में तो कहा है कि भोले इंसान के भीतर भगवान कोई न कोई अतिरिक्त गुण डाल देता है। जैसे धर्म के प्रति तत्परता, मीठी वाणी, दानशीलता, मित्रता का भाव, गंभीरता, परोपकार व प्रसन्न रहने का आग्रह। ये भोलेपन के बाय-प्रोडक्ट हैं।
इसीलिए कहावत भी है कि भोले का भगवान होता है। तो भले ही आपका भोलापन लोगों को नौटंकी लगे, उसे लेकर आपकी खिल्ली उड़ाई जाए, आपको परिहास का पात्र बनाया जाए, लेकिन हर हाल में अपने भीतर का भोलापन बचाए रखना और जहां भी उसको क्रिया में उतारना हो, बेशक उतार देना। भोलापन अपने आप में एक सद्गुण है और उसे औरों में बांटना भी बहुत बड़ी समाजसेवा है। इसमें पीछे मत रहिएगा।
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