बिहार की अपार प्रतिभा की गुफा के द्वार पर अली बाबा ने कब्ज़ा जमाए रखा है कोई तो बोले खुल जा सिम-सिम और द्वार खुल जाए
2017 में फ़िल्मकार अविनाश दास की स्वरा भास्कर और संजय मिश्रा अभिनीत फिल्म ‘आरा की अनारकली’ का प्रदर्शन हुआ था बिहार के कस्बे आरा में एक लोक गायिका के आंचलिक गीत और नृत्य अत्यंत लोकप्रिय होते हैं। मंच पर कार्यक्रम देना उसकी रोजी-रोटी बन जाती है।
ज्ञातव्य है कि बुंदेलखंड की तीजनबाई अपने जीवनकाल में ही किवदंती बन गईं थीं। भारत के सभी अंचलों में हमारी संस्कृति में लोक गीत अवाम के सुख-दुख का विवरण देते हैं। पारंपरिक इतिहास तो युद्ध में जय-पराजय की कथाएं अभिव्यक्त करता है। अरसे पहले लखनऊ की ट्विन कंपनी द्वारा जारी सिपहिया गीत अश्लील करार दिए गए थे, परंतु वो गीत दमित इच्छाओं की सच्चाई प्रस्तुत करते हैं।
बहरहाल फिल्म में सत्ता के नशे में चूर एक मंत्री जी आरा के कार्यक्रम में शिरकत करते हैं, जिसमें शामिल हो जाता है हवस का नशा और वे खुले मंच पर ही आरा के सामने अभद्र प्रस्ताव रखते हैं। उसके चरणों पर गिरकर गिड़गिड़ाते हैं।
कार्यक्रम के बाद उसके अधीन इंस्पेक्टर गायिका के पास पहुंचता है कि मंत्री जी की इच्छा पूरी कर दो। इन्कार पर मंत्री के गुंडे उसका जीना दूभर कर देते हैं। उसे मारा-पीटा जाता है। वह बचते-बचाते रेलवे स्टेशन पर पहुंचती है। कस्बे का ही एक साथी उसे दिल्ली ले आता है। इसका रिश्ता मानवीय करुणा का रिश्ता है।
बहरहाल वे दिल्ली की गरीब बस्ती में किराए का कमरा लेते हैं। इस साथी का एक मित्र एक रिकॉर्डिंग कंपनी में मालिक से निवेदन करता है कि एक बार उस गायिका आरा का गीत सुन ले। बहरहाल एक परीक्षण के बाद उसके गीत रिकॉर्ड किए जाते हैं और वह लोकप्रिय गायिका बन जाती है।
मंत्री के पास उसके गीतों की सीडी पहुंचती है। आरा का पता मिलते ही मंत्री जी के चमचे दिल्ली आकर उसका जीना कठिन कर देते हैं। परंतु उसका एक प्रशंसक गायिका को वह वीडियो देता है, जिसमें मंत्री का प्रस्ताव अंकित है।
गायिका अनारकली आरा आती है मंत्री जी उस पर फरार होने का दावा अदालत में हटा लेते हैं। एक आयोजन में मंत्री जी अपनी पत्नी व पुत्री संग पधारते हैं। अनारकली अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करती है। गीत के अंतिम हिस्से के समय मंत्री के उस अभद्र प्रस्ताव का वीडियो भी दिखाया जाता है।
उनकी हकीकत सामने आते ही उनकी पत्नी और पुत्री चले जाते हैं। उस गीत की कुछ पंक्तियां हैं, ‘हमको देख सुरती (तंबाखू) फांके, चोर नजर से लहंगा झांके, सरक-सरक सरकाए, मेरा लहंगा मारे जोर, चोर नजर से चीरे लहंगा...’ दृश्य फिल्म के अंतिम दृश्य में अनारकली अपने घर लौटती है।
भ्रष्ट मंत्री को सरे आम उसकी वैचारिक गंदगी सहित उजागर कर दिया है। फिल्म में अभिनय के लिए स्वरा को पुरस्कार दिया गया। ज्ञातव्य है कि स्वरा की मां नेहरू विश्वविद्यालय में अध्यापन करती थीं उनके पिता ने भी जेएनयू में शिक्षा ली है। वे जन आंदोलन में भाग लेती रही हैं।
व्यवस्था का विरोध अभिव्यक्त करती रही हैं। स्वरा एक पाक्षिक पत्रिका में लेख भी लिखती रही हैं। पत्रिका ‘आउटलुक’ का प्रकाशन प्रारंभ हो गया है। पत्रिका के पुनरागमन के पहले अंक में ही तानाशाही का विरोध अभिव्यक्त है। हाथरस का खुलासा भी किया गया है।
ज्ञातव्य है कि बिहार में जन्मे शत्रुघ्न सिन्हा लोकप्रिय सितारा रहे हैं। एक दौर में अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा की लोकप्रियता समान थी। उनकी पत्नी पूनम सिन्हा ने फिल्म ‘जोधा अकबर’ में अकबर की मां की भूमिका अभिनीत की थी। उनकी पुत्री सोनाक्षी सिन्हा सफल सितारा हैं।
बिहार में शेखर सुमन ने भी सफल पारी खेली है। हर क्षेत्र में बिहार की जमीन से सफल लोग आए हैं। बिहार की अपार प्रतिभा की गुफा के द्वार पर अली बाबा ने कब्ज़ा जमाए रखा है कोई तो बोले खुल जा सिम-सिम और द्वार खुल जाए।
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